विधुर गोरखा सैनिक सुरेंद्र जी और उनकी दुसरी पत्नी तालिबानी विधवा रज्जिया कि गाथा
वह उस समय कि बात है,, एक गोरखा फौजी,, जिनकी पत्नी कि मृत्यु हो चुकी थी,, जब अफगानिस्तान में पहली बार तालिबानी हुकुमत आई थी,, तब गोरखाओं ने तालिबानी आतंकियों का गांड फाड़ दिया था।। एक विधुर गोरखा सैनिक,, और तालिबान आतंकी कि विधवा,, जो अक्सर अपने बच्चों के जरुरी खर्चा पानी के गोरखाओं के खेमे में भीख मांगने आई थी।। और एक बार गोरखा सैनिक जो कि विधुर गोरखा फौजी था,, वह अकेले था और अपने कपड़े बदल रहा था शायद,, उसी समय तालिबानी विधवा को देख कर गोरखा फौजी के मन में लडडू फुटने लगा।। सोचा कि क्या छम्मक छल्लों लेडी है,, उसका तो अभी काम तमाम कर देना चाहिए।। क्योंकि आज इसकी चुत कि पुजा कर लिया जाए।। उसने तालिबानी विधवा को बातों बातों में फंसाकर रोक लिया और उसके खानदान, अतीत के बातें सबकुछ पुछने लगा ।। विधुर गोरखा सैनिक अक्सर,, उस औरत से मिलने के लिए तरह तरह का बहाना करने लगा।। और अपने मृत पत्नी के बारे में भि उसको बताने लगा।। दोनों में नजदीकीया बढ़ने लगी।। गोरखा सैनिक ने उसको अपने साथ रखी हुई चुनरी को उसके माथे पर ओढ़ा दिया और बोला कि आज से तु मैरी है,, और मै तेरा शौहर,...