चाय और पकोड़े
**रग्बी: आदिम युद्ध का शंखनाद**
बिना शस्त्र का युद्ध है रग्बी, ताकत का हुंकार है,
जंगल से भारी लकड़ी लाने सा, यह कड़ा प्रहार है।
बोरी उठाए मज़दूर सा कंधों पर भारी भार है,
चट्टान सा जिगर जहाँ, बस बल का ही सत्कार है।
**फुटबॉल: चरवाहे का अविरल प्रवाह**
पशु चराने निकले जैसे, थमती नहीं जहाँ डगर,
फुटबॉल है वो अविरल धारा, पल-पल बहता जिसमें हर।
रुकने का कोई काम नहीं, हर सिम्त दौड़ती पैनी नज़र,
पैरों की चपलता का जादू, थका न पाए जिसे सफ़र।
**क्रिकेट: धूप में तपती नियमित मज़दूरी**
क्रिकेट तो है सुबह से शाम की, कड़क धूप में मज़दूरी,
एक-एक ईंट जोड़कर जैसे, होती है दीवार पूरी।
धीरज का इम्तिहान है भारी, सब्र जहाँ है सबसे ज़रूरी,
नियमित ताकत, शांत साधना, देता है हर रन को मंज़ूरी।
**बेसबॉल: गृहिणी का सूक्ष्म गणित**
वास्तु का ज्ञान रखने वाली, गृहिणी सा बेसबॉल का रूप,
बाहर दिखती शांत व्यवस्था, अंदर गणनाएं अनूप।
मिलीसेकंड का खेल है सारा, रणनीति की छांव और धूप,
सटीक गणित के चेहरे दो हैं, दोनों ही हैं चतुर स्वरूप।
**उपसंहार**
कोई बल का दंगल है, कोई सब्र की बहती धार,
जीवन के ही अलग-अलग रूपों का, खेल रहे विस्तार।