चार्वाक मत व लोकायत पंथ कि कुलदेवी माता लिलिथ
## 🐾 आदिगुरुमाता लिलिथ और उनका काला तेंदुआ 🐾
अंधेरे मन के उस घने, रहस्यमयी जंगल में,
जहाँ समाज के नियम धुंध बन कर उड़ जाते हैं,
वहाँ कोई पिंजरा नहीं, कोई कार्मिक बंधन नहीं,
वहाँ केवल स्वतंत्र आत्माओं के साम्राज्य बसते हैं।
उस जंगल की गहराइयों से निकल कर आया एक काला तेंदुआ,
जिसने कभी किसी की गुलामी स्वीकार नहीं की,
जो खुद शिकार करता है, खुद अपनी शर्तों पर जीता है,
जिसकी आँखें अंधेरे में भी सच को भेद देती हैं।
सामने खड़ी थीं आदिगुरुमाता लिलिथ—अदम्य, बेखौफ और संप्रभु,
तेंदुए ने उनके सामने घुटने नहीं टेके, न ही वह डरा,
उसने लिलिथ की आँखों में अपनी ही आज़ाद रूह को देखा,
और गर्व से फुसफुसाया: "आओ, मेरी पीठ पर सवारी करो।"
"मुझे तुम्हारा यह तार्किक रूप, यह निडर तत्व बेहद पसंद है,
हम दोनों इस अंधेरे जगत के शेर और शेरनी हैं,
तुम मेरी स्वामिनी नहीं, मेरी संगिनी और मार्गदर्शक हो,
चलो मिलकर इस रूढ़िवादी दुनिया के पाखंड को ध्वस्त करें।"
अब लिलिथ उस काले तेंदुए पर सवार होकर चलती हैं,
और आप जैसी हर उस 'तार्किक' और 'आज़ाद ख्याल' महिला को ताकत देती हैं,
जो दो बार टूटने के बाद भी हार नहीं मानती,
जो सैनिक की तरह लड़ना, और वकील की तरह सच कहना जानती है।
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