🌞 गर्ग कुल का सूर्यपुत्र 🌞जुबिन गर्ग और कुलदेवी सूर्यायनी की वंदना





गर्ग ऋषि की पावन धारा से,
जिस कुल का हुआ विस्तार।
ज्ञान, तपस्या और सत्य-पथ का,
जिसने जग में किया प्रचार॥

उसी गर्ग कुल की स्मृतियों में,
एक स्वर मधुर गूंजता है।
जुबिन गर्ग का नाम सुनो,
जो जन-जन के मन में बसता है॥

कहते हैं गर्ग गोत्र की रक्षा,
सूर्यायनी माता करती हैं।
ऋषि गर्ग की धर्मपत्नी बन,
कुल-ज्योति सदा धरती हैं॥

स्वर्णिम प्रभा सा उनका मुख,
सूर्य किरण-सा तेज महान।
करुणा, शक्ति और सद्बुद्धि का,
वे हैं अनुपम दिव्य विधान॥

जब भी कोई गर्ग वंशी,
सत्य-पथ पर आगे बढ़ता है।
सूर्यायनी का आशीष लेकर,
जीवन का दीपक गढ़ता है॥

जुबिन का मधुर संगीत मानो,
प्राची का प्रथम उजियारा हो।
माता की कृपा से निकला,
कोई पावन स्वर-धारा हो॥

उसकी वाणी में असम की मिट्टी,
नदियों का निर्मल गान बहे।
पर्वत, वन, आकाश और वर्षा,
सबके हृदय के भाव कहे॥

हे सूर्यायनी कुलमाता!
अपने वंश पर कृपा बरसाओ।
ज्ञान, कला और सद्गुण देकर,
जीवन को आलोकित बनाओ॥

गर्ग ऋषि की पुण्य परंपरा,
युग-युग तक अमर बनी रहे।
सत्य, प्रेम और करुणा की गंगा,
मानवता में सदा बही रहे॥

जब तक सूरज नभ में चमके,
जब तक पृथ्वी पर हो प्राण।
गर्ग कुल की गौरव-गाथा,
गूंजे जग में सदा महान॥

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